शिवली कानपुर देहात राहुल मिश्रा -: पतिव्रतधर्म के आगे देवता भी नतमस्तक हो जाते हैं जहां तीनों देवों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी सती अनुसूया के समक्ष शिशु रुप में हो गये इस लिए नारी शक्ति को कम नहीं आंकना चाहिए। उक्त प्रसंग नुनारी बहादुरपुर औनहां के त्यागी आश्रम हनुमान गढ़ी पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा वाचिका साध्वी राज किशोरी शुक्ला ने श्रोताओं के बीच कही। शिवली क्षेत्र नुनारी बहादुरपुर औनहां स्थित त्यागी आश्रम हनुमान गढ़ी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा वाचिका साध्वी राज किशोरी शुक्ला ने माता अनुसूया चरित्र, शिव पार्वती विवाह की कथा का रसपान करवाया उन्होंने श्रोताओं को सती अनुसूया के बारे में बताया कि सती अनुसूया अपने पतिव्रत धर्म से समस्त नारी शक्ति को एक संदेश दिया कि हर नारी अपने पति की सेवा से पतिव्रत धर्म अपना सकती है और वह अपनी शक्ति से बडी से बडी शक्ति को मात दे सकती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम वन काल के समय सीता को अनुसूया से कुछ शिक्षा लेने के लिए प्रेरित किया तो मां अनुसूया के पास सीता गयी और जानकी ने उन्हें नमन किया जबकि जानकी भी सती थी लेकिन उन्होंने उनसे कुछ सीखा जिसमें अनुसूया ने सीता को सीख देते हुए कहा कि पति का अपमान करने वाली नारियां सदा यम के दंड की भागी भी बनती हैं ऐसी प्रेरणा दायक शिक्षा से जानकी का आत्मबल और बढ गया और जानकी ने हमेशा अपने पति के प्रतिकूल नहीं गई। अपने पतिवृत धर्म से ही तो अनुसूया ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश को छ: छ: महीने का शिशु बना दिया। इसलिए नारी शक्ति अगर अपने आप पर उतर आए तो सारे ब्रह्माण्ड को हिला सकती है इसलिए नारी शक्ति को कम आंकने की भूल कतई न करें। कथा के दौरान व्वस्थापक राम प्रकाश द्विवेदी, मूलचंद अवस्थी , अवधेश त्रिवेदी , प्रदीप त्रिवेदी, श्री नारायण, कृपा शंकर कश्यप, अरविंद वर्मा, छेदीलाल शुक्ला, तेज सिंह यादव ,सत्य प्रकाश, पप्पू कश्यप ,संतोष कश्यप , अंकित कश्यप ,सुमित कश्यप सहित सैकड़ो लोग मौजूद रहे।
पति का अपमान करने वाली नारियां बनती हैं यम के दंड की भागी: साध्वी राज किशोरी
4/08/2026 04:40:00 pm
0
शिवली कानपुर देहात राहुल मिश्रा -: पतिव्रतधर्म के आगे देवता भी नतमस्तक हो जाते हैं जहां तीनों देवों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी सती अनुसूया के समक्ष शिशु रुप में हो गये इस लिए नारी शक्ति को कम नहीं आंकना चाहिए। उक्त प्रसंग नुनारी बहादुरपुर औनहां के त्यागी आश्रम हनुमान गढ़ी पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा वाचिका साध्वी राज किशोरी शुक्ला ने श्रोताओं के बीच कही। शिवली क्षेत्र नुनारी बहादुरपुर औनहां स्थित त्यागी आश्रम हनुमान गढ़ी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा वाचिका साध्वी राज किशोरी शुक्ला ने माता अनुसूया चरित्र, शिव पार्वती विवाह की कथा का रसपान करवाया उन्होंने श्रोताओं को सती अनुसूया के बारे में बताया कि सती अनुसूया अपने पतिव्रत धर्म से समस्त नारी शक्ति को एक संदेश दिया कि हर नारी अपने पति की सेवा से पतिव्रत धर्म अपना सकती है और वह अपनी शक्ति से बडी से बडी शक्ति को मात दे सकती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम वन काल के समय सीता को अनुसूया से कुछ शिक्षा लेने के लिए प्रेरित किया तो मां अनुसूया के पास सीता गयी और जानकी ने उन्हें नमन किया जबकि जानकी भी सती थी लेकिन उन्होंने उनसे कुछ सीखा जिसमें अनुसूया ने सीता को सीख देते हुए कहा कि पति का अपमान करने वाली नारियां सदा यम के दंड की भागी भी बनती हैं ऐसी प्रेरणा दायक शिक्षा से जानकी का आत्मबल और बढ गया और जानकी ने हमेशा अपने पति के प्रतिकूल नहीं गई। अपने पतिवृत धर्म से ही तो अनुसूया ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश को छ: छ: महीने का शिशु बना दिया। इसलिए नारी शक्ति अगर अपने आप पर उतर आए तो सारे ब्रह्माण्ड को हिला सकती है इसलिए नारी शक्ति को कम आंकने की भूल कतई न करें। कथा के दौरान व्वस्थापक राम प्रकाश द्विवेदी, मूलचंद अवस्थी , अवधेश त्रिवेदी , प्रदीप त्रिवेदी, श्री नारायण, कृपा शंकर कश्यप, अरविंद वर्मा, छेदीलाल शुक्ला, तेज सिंह यादव ,सत्य प्रकाश, पप्पू कश्यप ,संतोष कश्यप , अंकित कश्यप ,सुमित कश्यप सहित सैकड़ो लोग मौजूद रहे।
अन्य ऐप में शेयर करें


