औरैया: ततारपुर कलां में मगरमच्छ के बच्चों की दहशत , 3 दिन के रेस्क्यू के बाद भी खाली हाथ लौटी वन विभाग की टीम , 80% पानी निकालने और झाड़ियां छांटने के बाद भी नहीं मिला सुराग , सुरक्षा के लिए गांव में तैनात किए गए दो 'कैटल कैचर'

सिराजुद्दीन (मुन्ना) पत्रकार
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अयाना (औरैया)। अयाना थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव ततारपुर कलां में पानी से भरे एक गड्ढे में मगरमच्छ के बच्चे दिखने के बाद से ग्रामीणों की रात की नींद और दिन का चैन उड़ा हुआ है। वन विभाग की टीम ने सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी बेहद सघन रेस्क्यू अभियान चलाया। हालांकि, कड़े संघर्ष और देर शाम तक चली खोजबीन के बाद भी मगरमच्छ के बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल सका। इसके बाद वन विभाग ने फिलहाल के लिए अपना अभियान बंद कर दिया है जिससे ग्रामीणों में दहशत और ज्यादा बढ़ गई है।

कीचड़ और झाड़ियों ने बढ़ाई मुश्किल, निकाला 80 फीसदी पानी
ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक बीते शनिवार को गांव में मौजूद एक गहरे पानी वाले गड्ढे में मगरमच्छ के बच्चे तैरते हुए देखे गए थे। इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दी गई। रेस्क्यू के पहले दिन टीम ने पंपिंग सेट लगाकर गड्ढे का पानी खाली करने की कोशिश की लेकिन भारी कीचड़ और घनी कंटीली झाड़ियों की वजह से कामयाबी नहीं मिली। सोमवार को वन विभाग ने एक बार फिर पूरी ताकत झोंकी और गड्ढे का करीब 80 प्रतिशत पानी बाहर निकाल दिया। इसके बाद दलदली कीचड़ और झाड़ियों के बीच घंटों तक सघन तलाशी अभियान चलाया गया लेकिन वन्यजीवों का कोई पता नहीं चला।
सुरक्षा को लेकर चिंतित ग्रामीण, बच्चों और मवेशियों पर खतरा
मगरमच्छ के बच्चों का कोई सुराग न मिलने से ततारपुर कलां के ग्रामीण बेहद खौफजदा हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मगरमच्छ के बच्चे आसपास ही कहीं छिप गए हैं, तो गांव के छोटे बच्चों और पालतू पशुओं की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। लोगों को डर है कि पानी कम होने के बाद ये वन्यजीव आबादी की तरफ रुख कर सकते हैं।
बोले जिम्मेदार:
गड्ढे का अधिकांश पानी निकालकर कीचड़ और झाड़ियों में व्यापक तलाशी ली गई, लेकिन कोई वन्यजीव हाथ नहीं आया। इसलिए फिलहाल रेस्क्यू अभियान रोक दिया गया है। हालांकि, एहतियात के तौर पर गांव में दो कैटल कैचर तैनात कर दिए गए हैं। ग्रामीणों से अपील है कि यदि उन्हें दोबारा कहीं भी मगरमच्छ या उसका बच्चा दिखाई दे, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें ताकि तत्काल कार्रवाई की जा सके। — अभिषेक मिश्रा, वन दरोगा
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