योगेंद्र गुप्ता अजीतमल (औरैया)। एक ओर सरकार गरीबों को आवास, स्वच्छता, शिक्षा और बेहतर जीवन देने के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित कर रही है वहीं दूसरी ओर बाबरपुर कस्बे के फफूंद रोड पर रहने वाला लोहपीटा समाज का एक परिवार आज भी नाले के बदबूदार पानी, कीचड़ के बीच जीवन बिताने को विवश है। वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या ने इस परिवार की जिंदगी को ऐसा बना दिया है कि दो वक्त की रोटी भी नाले के बदबूदार पानी के बीच पकानी पड़ रही है।
परिवार की पीड़ा मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल तक पहुंची लेकिन शिकायतों का भी नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई असर दिखाई नहीं दिया। समस्या के समाधान की बात तो दूर आज तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर इस परिवार की स्थिति देखने तक की जरूरत नहीं समझी।
स्थानीय लोगों के अनुसार पुलिया के पास मात्र तीन मीटर नाले का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। यही अधूरा नाला वर्षों से स्थायी जलभराव का कारण बना हुआ है। नगर पंचायत जल निकासी पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है लेकिन इस छोटे से अधूरे कार्य को पूरा कराने के लिए मानो बजट और संवेदनशीलता दोनों का अभाव है।
सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे रहने वाली 75 वर्षीय कमला देवी के परिवार में कुल दस सदस्य हैं जिनमें पांच बच्चे शामिल हैं। आर्थिक तंगी और उपेक्षा के कारण ये बच्चे स्कूल जाने के बजाय दिनभर सड़क किनारे भटकते रहते हैं। शिक्षा विभाग के स्कूल चलो अभियान की पहुंच भी इन तक नहीं हो सकी। नौनिहालों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं लेकिन वे आज भी अभाव और उपेक्षा के बीच अपना बचपन गुजार रहे हैं।
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परिवार की महिलाओं और मासूम बच्चियों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। खुले आसमान के नीचे बीच बस्ती में चारों ओर जलभराव और गंदगी के बीच वर्षों से जीवन गुजारना उनकी मजबूरी बन चुका है। बदबूदार पानी के बीच भोजन बनता है बच्चे पलते हैं और हर समय संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है जब पूरा क्षेत्र दलदल में तब्दील हो जाता है।
कमला देवी की आंखों में अब उम्मीद से ज्यादा निराशा दिखाई देती है। वह भावुक होकर कहती हैं कि सिर्फ चुनाव में वोट के लिए लोग समस्याओं से निजात दिलाने का खोखला वादा वर्षों से करते चले आ रहे हैं । उन्होंने कहा कि ठिठुरती सर्दियां भी इसी बरगद के नीचे काट दीं। बस एक सपना था कि सिर छिपाने को पक्का मकान मिल जाए लेकिन अब वह उम्मीद भी लगभग खत्म हो चुकी है। यह परिवार आज भी इस इंतजार में है कि कोई जनप्रतिनिधि , कोई प्रशासनिक अधिकारी या कोई जिम्मेदार व्यक्ति उनके आशियाने तक पहुंचे और उनकी पीड़ा को अपनी आंखों से देखे और वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान कराए।
इस संबंध में हमारे संवाददाता ने अधिशासी अधिकारी प्रदीप गौतम से बात करनी चाही लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी तब नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अखिलेश चक से बात की तो उन्होंने बताया कि जल्द ही नाले की सफाई करा कर जल निकासी की व्यवस्था कराई जाएगी ।
अजीतमल से संवाददाता योगेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट -








