सहार (औरैया)। सहार कस्बे में स्थित बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति (बी पैक्स) परिसर में सोमवार को खाद वितरण में हो रही धांधली और परेशानियों को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के जिलाध्यक्ष विपिन राजपूत और ब्लॉक अध्यक्ष जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में किसानों ने समिति पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर एक मांग पत्र सौंपा।
भाकियू की 5 प्रमुख मुख्य मांगें:
धरना-प्रदर्शन के दौरान किसान यूनियन ने समिति प्रबंधन और प्रशासन के सामने निम्नलिखित पांच प्रमुख मांगें रखीं:
धरना-प्रदर्शन के दौरान किसान यूनियन ने समिति प्रबंधन और प्रशासन के सामने निम्नलिखित पांच प्रमुख मांगें रखीं:
- जबरन न दी जाए नैनो खाद: किसानों को मुख्य खाद के साथ जबरदस्ती (जबरन) नैनो डीएपी और नैनो यूरिया लेने पर मजबूर न किया जाए।
- कागज लेते ही मिले खाद: किसानों के कागजात (फार्मर आईडी, आधार कार्ड) पहले से जमा कराकर न रखे जाएं। जिस दिन कागज लिए जाएं, उसी दिन रसीद काटकर खाद उपलब्ध कराई जाए।
- भेदभाव और धांधली पर रोक: किसानों के साथ खाद वितरण में किया जा रहा भेदभाव और मनमानी तुरंत बंद हो।
- स्टॉक बोर्ड पर अंकन: किसानों की जानकारी के लिए समिति के स्टॉक बोर्ड पर उपलब्ध खाद की मात्रा को स्पष्ट रूप से रोजाना अंकित किया जाए।
- समय पर खुले समिति: सहकारी समिति से सुचारू रूप से खाद वितरण के लिए समिति को निर्धारित समय पर खोला जाना सुनिश्चित किया जाए।
भाकियू जिलाध्यक्ष विपिन राजपूत ने चेतावनी देते हुए कहा कि क्षेत्रीय किसानों की समस्याओं से पहले भी अवगत कराया गया था, लेकिन मौके पर समाधान नहीं हुआ। जब तक किसानों की इन समस्याओं का स्थाई निस्तारण नहीं होगा, तब तक किसान धरना देने के लिए विवश रहेंगे।
इन किसानों ने दर्ज कराया विरोध:
धरने में मुख्य रूप से आशुतोष कुमार (पुर्वा हिरा), प्यारे लाल (पुर्वा तरा), शंभू दयाल (पुर्वा हिरा), संजीव कुमार (पुर्वा हिरा), लाला राम (पुर्वा नत्थू), राधेश्याम (पुर्वा बलक), धर्मदत्त (देवीदास), रामशंकर (देवीदास), राहुल (पुर्वा सिहान), बलराम (भूलाहार), रीना देवी (हरबंशपुर), विमल (भूलाहार), नौतेेश (कमार), चुन्नीलाल (पुर्वा रावत), राम आसरे (पुर्वा रावत), बबली (पुर्वा तरा) और श्याम सिंह (चन्दूपुर) सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे।
धरने में मुख्य रूप से आशुतोष कुमार (पुर्वा हिरा), प्यारे लाल (पुर्वा तरा), शंभू दयाल (पुर्वा हिरा), संजीव कुमार (पुर्वा हिरा), लाला राम (पुर्वा नत्थू), राधेश्याम (पुर्वा बलक), धर्मदत्त (देवीदास), रामशंकर (देवीदास), राहुल (पुर्वा सिहान), बलराम (भूलाहार), रीना देवी (हरबंशपुर), विमल (भूलाहार), नौतेेश (कमार), चुन्नीलाल (पुर्वा रावत), राम आसरे (पुर्वा रावत), बबली (पुर्वा तरा) और श्याम सिंह (चन्दूपुर) सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे।
300 बोरी यूरिया और 300 बोरी डीएपी मिली: समिति सचिव
दूसरी ओर, किसानों की शिकायतों पर समिति सचिव मधु जायसवाल ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि समिति को 300 बोरी यूरिया और 300 बोरी डीएपी प्राप्त हुई थी। इनमें से रविवार तक 251 बोरी यूरिया किसानों को बांटी जा चुकी थी, जबकि शेष 49 बोरी का वितरण सोमवार को पूरा कर लिया गया। इसी तरह 31 जुलाई को मिली 300 बोरी डीएपी में से अब तक 70 किसानों को खाद दी जा चुकी है और 230 बोरी डीएपी अभी भी स्टॉक में उपलब्ध है। इसके अलावा, 600 बोरी यूरिया की नई मांग भी भेजी जा चुकी है।
दूसरी ओर, किसानों की शिकायतों पर समिति सचिव मधु जायसवाल ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि समिति को 300 बोरी यूरिया और 300 बोरी डीएपी प्राप्त हुई थी। इनमें से रविवार तक 251 बोरी यूरिया किसानों को बांटी जा चुकी थी, जबकि शेष 49 बोरी का वितरण सोमवार को पूरा कर लिया गया। इसी तरह 31 जुलाई को मिली 300 बोरी डीएपी में से अब तक 70 किसानों को खाद दी जा चुकी है और 230 बोरी डीएपी अभी भी स्टॉक में उपलब्ध है। इसके अलावा, 600 बोरी यूरिया की नई मांग भी भेजी जा चुकी है।
नियमों के तहत ही मिलेगी खाद, बाहरी किसानों से बढ़ता है दबाव
सचिव मधु जायसवाल के मुताबिक, इस समिति के अंतर्गत सहार, पुर्वा दानशाह, पुर्वा रावत, रामनगर सहित कुल दस ग्राम पंचायतें आती हैं। कई बार बिधून ब्लॉक के किसान भी यहां खाद लेने पहुंच जाते हैं, जिससे समिति पर अतिरिक्त दबाव बनता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद वितरण से पहले किसानों की 'फार्मर रजिस्ट्री' और 'आधार कार्ड' के आधार पर नामांकन किया जाता है, जिसके बाद ही नियमानुसार खाद उपलब्ध कराई जाती है।
सचिव मधु जायसवाल के मुताबिक, इस समिति के अंतर्गत सहार, पुर्वा दानशाह, पुर्वा रावत, रामनगर सहित कुल दस ग्राम पंचायतें आती हैं। कई बार बिधून ब्लॉक के किसान भी यहां खाद लेने पहुंच जाते हैं, जिससे समिति पर अतिरिक्त दबाव बनता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद वितरण से पहले किसानों की 'फार्मर रजिस्ट्री' और 'आधार कार्ड' के आधार पर नामांकन किया जाता है, जिसके बाद ही नियमानुसार खाद उपलब्ध कराई जाती है।




