साध्वी राज किशोरी शुक्ला ने भक्तों को सुखदेव जन्म की कथा का कराया रसपान

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 कानपुर देहात / राहुल मिश्रा -: परीक्षित का जीवन उनके जन्म से लेकर उनके धर्म परायण शासन और अंततः श्राप तक कर्तव्य आध्यात्मिकता और कलयुग के परिहार्य उदय जैसे विषयों को उजागर करता है। उक्त व्याख्यान नुनारी बहादुरपुर औनहां गांव स्थित त्यागी आश्रम हनुमान गढ़ी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचिका साध्वी राज किशोरी शुक्ला ने श्रोताओं के बीच कही।शि वली क्षेत्र के नुनारी बहादुरपुर औनहां स्थित त्यागी आश्रम हनुमान गढ़ी पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचिका साध्वी राज किशोरी शुक्ला ने परीक्षित जन्म और सुखदेव जन्म की कथा का रसपान करवाया।

कथा वाचिका साध्वी राज किशोरी शुक्ला
जिसमें उन्होंने बताया कि परीक्षित का जन्म असाधारण था जब उनका जन्म उत्तरा के गर्भ में हुआ तो वह चारों ओर ऐसे देखने लगे मानो किसी ऐसे व्यक्ति को खोज रहे हैं जिसे उन्होंने पहले भी कहीं देखा है जब लोगों ने इसके बारे में पूछा तो ऋषि नारद ने उन्हें समझाया की परीक्षित ने गर्भ में ही भगवान श्री कृष्ण को देखा था जिन्होंने उन्हें दिव्य दर्शन दिए थे इस प्रकार बच्चे का नाम परीक्षित रखा गया जिसका संस्कृत में भी अर्थ मिलता है जिसकी जांच की जाती है या जिसे देखा जाता है उसी का नाम परीक्षित है। परीक्षित का जीवन उनके जन्म से लेकर उनके धर्म परायण शासन और अंततः श्राप तक कर्तव्य आध्यात्मिकता और कलयुग के परिहार्य उदय जैसे विषयों को उजागर करता है।जिनको सात दिनों तक श्रीमद् भागवत कथा के रसपान से मोक्ष की प्राप्ति हुई कथा में मुख्य रूप अप्पू त्रिवेदी, शिव कुमार सैनी,शिवम द्विवेदी, घसीटे राठौर,वीरु तिवारी, राजू गुप्ता, शैलेंद्र शुक्ला, सौरभ, विवेक,सोनू, सुरेश कश्यप संतोष कश्यप,अजय पाल कश्यप, श्यामू तिवारी,राम शंकर सहित काफी संख्या में श्रोता गण मौजूद रहे

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