सोमवार दोपहर गश खाकर घर के पास सड़क मार्ग पर गिरे थे हवलदार राज कपूर, अस्पताल ले जाते समय हुई थी मौत
राहुल मिश्रा/ कानपुर देहात - अवकाश पर घर आए सैनिक की सोमवार दोपहर अचानक हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें इलाज के लिए सेवन एयर फोर्स हॉस्पिटल चकेरी में लेकर गए थे जहां डाक्टरों ने सैनिक को मृत घोषित कर दिया। सैनिक की मौत की सूचना पाकर स्वजनों में रोना पीटना मच गया। बुधवार को फौजी का पार्थिव शरीर गांव बिक्रमपुर आया तो वहां ग्रामीणों का भरी जनसैलाब उमड पड़ा। सैनिक की मौत की सूचना पककर राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने पहुंच पुष्पांजलि दी और असम रेजीमेंट के नायक सूबेदार यशी शिरिंग के नेतृत्व में पहुंचे सेना के जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी। इसके पश्चात वहीं गांव में ही सैनिक का अंतिम संस्कार किया गया।
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| दिवंगत सैनिक |
बताते चलें कि शिवली कोतवाली क्षेत्र के विक्रमपुर गांव निवासी सेवानिवृत्ति फौजी राजेंद्र सिंह चौहान के तीन पुत्र जयकुमार सिंह, राज कपूर सिंह चौहान तथा विक्रम सिंह चौहान तीनों भाई फौज में देश सेवा कर रहे हैं। राज कपूर सिंह चौहान इन दिनों भारतीय थल सेना अंबाला कैंट हरियाणा की 67 इंजिनियर्स ब्रिज रेजिमेंट में कार्यरत थे और जुलाई 2026 को उन्हें सेवा निवृत्त होना है। इन दिनों वह अवकाश पर घर आए थे। राजेंद्र सिंह अपने पूरे परिवार के साथ गंगागंज पनकी कानपुर नगर में रहते हैं। राज कपूर की पत्नी अर्चना सिंह गजनेर में स्थित कंचन सिंह भूली देवी महाविद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्य रत हैं।
*सोमवार को सैनिक घर जाते समय सड़क मार्ग पर गश खाकर गिरे*
दिवंगत फौजी की पत्नी अर्चना ने बताया कि सोमवार की दोपहर उसके पति किसी काम से बाजार गए थे वहां से वापस लौटते समय सड़क मार्ग पर तेज धूप होने की वजह से गैस खाकर गिर गए। पड़ोसियों की सूचना पर तत्काल राज कपूर को उपचार के लिए सेवेन एयर फोर्स हॉस्पिटल चकेरी कैंट में ले जाया गया किंतु वहां मौजूद डॉक्टरों ने राज कपूर को मृत घोषित कर दिया। फौजी की मौत की सूचना मिलते ही उसकी पत्नी अर्चना सिंह, पिता राजेंद्र सिंह चौहान, 13 वर्षीय पुत्र अक्षय सिंह तथा 15 वर्षीय पुत्री आराध्या का रो रो कर बुरा हाल हो गया।
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| सलामी देते असम रेजीमेंट के जवान |
*मिलनसार और हंसमुख स्वभाव के थे हवलदार राज कपूर*
फौजी राज कपूर के बचपन के साथी विक्रमपुर गांव निवासी गजेंद्र सिंह सचिन सिंह गोविंद हिमांशु राजेंद्र सिंह प्रमोद तिवारी आदि ने बताया कि फौजी काफी मिलनसार और हंसमुख स्वभाव का था। राज कपूर जब भी छुट्टी पर आते थे तो ज्यादा समय गांव में ही बिताया करते थे और देर रात तक अपने साथियों के साथ गपशप किया करते थे। गांव के कमजोर वर्ग के लोगों की हमेशा हर प्रकार से मदद किया करता था । बीते दिनों को याद करते हुए उनके साथियों के आंसू बंद होने का नाम नहीं ले रहे थे। दिवंगत के चचेरे भाई अवधेश सिंह ने बताया कि 2003 में 16 साल की उम्र में ही राज कपूर के सिर सेवा में भर्ती होने का जुनून सवार हो गया था। यह जुनून उनको विरासत में मिला क्योंकि उनके पिता और बड़े भाई सेवा में थे। 16 वर्ष की अल्प आयु में राज कपूर रुड़की केंद्र से भर्ती हुए और वर्तमान समय में वह अंबाला कैंट हरियाणा में तैनात थे।
*पिता के शव को देख बिलख कर रोए दोनों बच्चे*
दिवंगत सैनिक राजकपूर सिंह चौहान का तेरह बर्षीय पुत्र अक्षय सिंह और पंद्रह वर्षीय पुत्री आराध्या ने जैसे ही अपने पिता का पार्थिव शरीर देखा तो दोनों फफक कर रो पड़े। छोटी सी उम्र में पिता का साया सिर से उठ जाने के कारण दोनों बच्चे बेहाल हो रहे थे। बातचीत में दिवंगत के पुत्र ने भी बड़ा होने पर अपने बाबा व पिता तथा चाचा के पदचिन्हों पर चलकर सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करने की बात कही ।
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| पिता के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित करता बेटा |
बुधवार को फौजी का पार्थिव शरीर पैतृक गांव बिक्रमपुर पहुचा तो वहां क्षेत्रीय लोगों का हुजूम उमड पडा। सभी लोग फौजी के अंतिम दर्शन कर उन्हें पुष्पांजलि देने में जुट गये।प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने दिवंगत सैनिक को पुष्पांजलि दी तथा उसकी पत्नी व बच्चों को ढांढस बंधाया। सपा नेता नीरज सिंह , सपा महिला सभा की प्रदेश उपाध्यक्ष आशा सिंह, प्रधान पति बलवंत सिंह, राजेश सिंह, प्रमोद तिवारी आदि ने पहुंच दिवंगत सैनिक को पुष्पांजलि दी। असम रेजीमेंट के नायक सुबेदार यशी सीरिंग की अगुवाई में पहुचे सेना के जवानों ने अंतिम सलामी दी। इसके बाद दिवंगत के बड़े भाई जय कुमार सिंह चौहान के द्वारा दिवंगत फौजी की चिता को मुखाग्नि दी गई।
सैनिक के सम्मान और सुरक्षा की दृष्टि से सीओ रसूलाबाद आलोक कुमार तथा शिवली कोतवाली प्रभारी अमरेंद्र बहादुर सिंह, भावपुर चौकी प्रभारी सोनवीर सिंह मय पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे।




