टूटे क्रॉस, सड़कों पर बहता गंदा पानी: शिवली नगर पंचायत की बदहाल व्यवस्था उजागर

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 राहुल मिश्रा शिवली, कानपुर देहात।

विकास और स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों के बीच आदर्श नगर पंचायत शिवली की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कस्बे में जगह-जगह टूटे क्रॉस, बजबजाती नालियां और सड़कों पर बहता बदबूदार पानी लोगों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि आमजन का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है, जिससे नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।




कागजों तक सीमित सफाई अभियान, जनता परेशान

प्रदेश सरकार द्वारा स्वच्छता अभियान और सफाई व्यवस्था के लिए बजट जारी किया जाता है, लेकिन शिवली में यह अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहा है। नगर पंचायत की लापरवाही का खामियाजा कस्बावासियों को भुगतना पड़ रहा है। गंदगी और जलभराव के कारण लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।


आस्था के केंद्र की पहचान पर संकट

शिवली कस्बा भगवान जागेश्वर मंदिर के कारण आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन मंदिर तक जाने वाले मार्गों की दुर्दशा श्रद्धालुओं की आस्था पर भी असर डाल रही है। गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना श्रद्धालुओं के लिए मजबूरी बन गया है।


मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा दिक्कत

गांधीनगर, सुभाष नगर, शंकर नगर, साकेत नगर, जवाहर नगर और शिवाजी नगर जैसे प्रमुख वार्डों से रोजाना सैकड़ों लोग मंदिर जाते हैं। रास्तों में टूटे क्रॉस और गंदे पानी के कारण महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।


गंदगी से बढ़ रहा बीमारियों का खतरा

नगर की नालियों में जमा गंदा पानी और जगह-जगह जलभराव मच्छरों के पनपने का कारण बन रहा है। इससे बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बावजूद इसके, न तो फॉगिंग की व्यवस्था की गई और न ही सफाई व्यवस्था को दुरुस्त किया गया।


अधिकारियों की अनदेखी, जिम्मेदारी से बचने का प्रयास

जब इस मामले में नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी मनीष कुमार से बात की गई तो उन्होंने जानकारी न होने की बात कही और निरीक्षण के बाद सुधार का आश्वासन दिया। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी इस तरह के बयानों से अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहे हैं।


निष्कर्ष:
शिवली नगर पंचायत की लचर सफाई व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता ने कस्बे की स्थिति को बद से बदतर बना दिया है। यदि जल्द ही सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

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