शिवली कानपुर देहात।
साधन सहकारी समिति के जर्जर भवनों और प्रशासनिक उदासीनता अन्नदाताओं पर भारी पड़ रही है, जब मूल समिति का भवन खंडहर में तब्दील हो तो ऐसे में किसान खाद बीज लेने के लिए कई किलोमीटर के चक्कर न लगाएं तो क्या करे और ऊपर से आर्थिक चोट तथा समय दोनों बर्बाद करना पड़ रहा है। जिससे अन्नदाताओं में भारी आक्रोश पनप रहा है।
विकास खण्ड मैथा क्षेत्र के बाघपुर स्थित साधन सहकारी समिति कई वर्षों से जर्जर अवस्था में है और धीरे धीरे वह खंडहर में तब्दील हो गई है। यहां समिति होने के बावजूद धान और अन्य फसलों की बुवाई तथा रोपाई के इस सीजन में किसानों को खाद के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरी सहकारी समिति पर निर्भर रहना पड़ रहा है। वहां भी लंबी कतारों और सीमित स्टॉक के कारण किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। परेशान होकर किसान खुले बाजारों से ऊंचे दामों पर खाद और बीज खरीदने को मजबूर हैं। वही किसानों को सस्ती और समय पर खाद बीज उपलब्ध कराने के सरकारी दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। स्थानीय साधन सहकारी समिति का मुख्य भवन पिछले काफी समय से जर्जर स्थिति के कारण खाद का भंडारण और वितरण पूरी तरह ठप पड़ा है।
स्थाई किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समिति भवन की मरम्मत करा कर खाद वितरण शुरू नहीं कराया गया तो वह उग्र आंदोलन पर बाध्य होंगे।सहकारी समिति के सचिव शिव प्रसाद यादव ने बताया कि उन्होंने भवन के जीर्णोद्धार नये निर्माण और सुचारू खाद वितरण को लेकर शासन और सहकारिता विभाग को कई बार लिखित प्रस्ताव भेजे गए हैं इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। शासन की इस अनदेखी का खामियाजा सीधे तौर पर किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
यह समिति सालों से बंद पड़ी है अब हमें इसकी आदत हो गई है, खुले या बंद रहे। छोटे किसानों को पहले भी चक्कर काटने पड़ते थे और आज भी। कई बार शिकायतें की लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।
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| किसान कौशल किशोर पाण्डेय बसौसी, बाघपुर |
यह समिति कभी हमारे सुख दुख की साथी थी, आज इसकी हालत देखकर रोना आता है अब हमें निजी दुकानदारों से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है और अधिक खर्चा आ रहा है।
समिति खंडहर हो चुकी है। खाद बीज के लिए हमें मीलों दूर दूसरी सहकारी समिति में भटकना पड़ रहा है, जिस कारण से समय पर ना तो खाद मिलता है और ना ही बीज।
जिम्मेदारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए जिससे हम किसानों को दूर जाने का चक्कर बचे तथा खर्च भी बचे। समय से बुआई हो जाने पर और समय से खाद मिल जाने पर फसल की पैदावार अच्छी होती है।





