सावन का पहला सोमवार: भोर पहर से ही शिवालयों में गूंजा हर-हर महादेव का जयघोष, दर्शन को भक्तों की उमड़ी भारी भीड़

राहुल मिश्रा
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शिवली के जागेश्वर महादेव मंदिर, ओंकारेश्वर महादेव, बैरी के महाकेश्वर महादेव, नर्मदेश्वर मंदिर, रामेश्वर महादेव मंदिर आदि शिवालयों में दर्शन हेतु सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, गंगाजल और दूध आदि अर्पण कर मांगी सुख, समृद्धि और शांति।


शिवली कानपुर देहात।


देवो के देव महादेव भगवान शिवशंकर को प्रिय सावन माह के पहले सोमवार को समस्त शिवालय सज धज कर तैयार हो गए। प्रथम सोमवार को शिवालयों में घंटा घड़ियाल के साथ बम-बम भोले, हर-हर महादेव के नारे गुंजाएमान हो गए। सावन के प्रथम सोमवार को लेकर अतिप्राचीन जागेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की व्यवस्थाओं के लिए रविवार शाम तक तैयारियां जोरों पर चलती रहीं। शिवली तथा आस पास के सिद्धपीठों एवं शिवालयों में सावन के महीना में भक्तों का रेला रहेगा। सुबह-सुबह शिव मंदिरों में अभिषेक होगा। घी, गंगाजल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद से भगवान का स्नान कराया जाएगा।


शिवली स्थित जागेश्वर महादेव मंदिर में विराजमान भोलेनाथ 


आखिर क्यों हैं श्रावण मास का महत्व


श्रावण मास का अत्यधिक महत्व क्यों है इस बात पर विद्वान आचार्यों का मत है कि पौराणिक मान्यता के अनुसार हिन्दू धर्मग्रंथों में कहा गया है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान करने से भगवान शिव के शरीर का तापमान बढ़ने लगा था। ऐसे में शरीर को शीतल रखने के लिए भोलेनाथ ने चंद्रमा को अपने सिर पर धारण किया और अन्य देव उन पर जल की वर्षा करने लगे। यहां तक कि इन्द्र देव भी यह चाहते थे कि भगवान शिव के शरीर का तापमान कम हो, इसलिए उन्होंने अपने तेज से मूसलाधार बारिश कर दी। इस वजह से सावन के महीने में अत्याधिक बारिश होती है, जिससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव के भक्त कावड़ ले जाकर गंगा का पानी शिव की प्रतिमा पर अर्पित कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयत्न करते हैं। इसके अलावा सावन माह के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव पर जल चढ़ाना शुभ और फल दायी है।सावन के महीने में व्रत रखने का भी विशेष महत्व है।


आचार्य अवधेश मिश्रा ने बताई पूजन विधि


  कस्बा शिवली के विद्वान आचार्य पंडित अवधेश मिश्रा ने सावन महीने में भोलेनाथ की पूजन विधि के बारे में बताते हुए कहा कि सावन में भगवान भोले की विशेष रूप से पूजा की जाती है। महादेव के अभिषेक से पूजन आरम्भ होता है। अभिषेक में महादेव को जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगाजल, गन्ना रस आदि से स्नान कराया जाता है। अभिषेक के बाद बेलपत्र, समी पत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, ऑक मदार, जंवाफूल, कनरे, राई फूल से शिवजी को प्रसन्न किया जाता है। इसके साथ ही भोग के रूप में धतूरा, भांग और श्रीफल चढ़ाया जाता है।




मंदिर के महंत बाबा राकेश पूरी ने बताया श्रावण महीने का महत्व


 जागेश्वर महादेव मंदिर के महंत बाबा राकेश पूरी के अनुसार सनानत धर्म में श्रावण महीने का बहुत महत्व है। शिव पुराण के अनुसार भगवान शंकर ने शप्त ऋषियों को वरदान दिया था कि जो भी भक्त श्रावण मास में उनकी पूजा, आराधना एवं नित्य अभिषेक करेगा और बेलपत्र चढ़ाएगा। उनके समस्त मनोकामना पूर्ण होगी। सावन महीने में ओम नम शिवाय का जाप भर करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

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