औरैया । जिलाधिकारी बृजेश कुमार की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में दुग्ध विकास विभाग उत्तर प्रदेश एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए चयनित 28 लाभार्थियों को चयन पत्र वितरित किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा किसानों एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र पशुपालकों तक पहुंचाना सभी संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है जिलाधिकारी ने इण्डियन बैंक, कानपुर जोन के प्रभारी बैंक प्रबंधक को निर्देशित किया कि नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बैंकिंग संबंधी कठिनाइयों का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि पात्र लाभार्थियों को समय पर ऋण एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और वे योजनाओं का पूरा लाभ प्राप्त कर सकें। मुख्य विकास अधिकारी राम कृपाल चौधरी ने अपने संबोधन में चयनित लाभार्थियों से कहा कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी आवश्यक मानकों एवं औपचारिकताओं को पूर्ण करते हुए अनुदान प्राप्त करें तथा योजनाओं का सदुपयोग कर डेयरी व्यवसाय को स्वरोजगार एवं आय का स्थायी माध्यम बनाएं।
कॉन्क्लेव में कृषि विज्ञान केन्द्र अछल्दा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रामपलट ने पशुपालकों को नेपियर चारा घास की वैज्ञानिक ढंग से रोपाई, हरे चारे के उत्पादन तथा चारा प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने संतुलित एवं पौष्टिक चारे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुणवत्तापूर्ण चारा ही दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की आधारशिला है। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सदर ने नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत संचालित नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना, मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना तथा मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए पात्रता, आवेदन प्रक्रिया एवं मिलने वाले लाभों से पशुपालकों को अवगत कराया। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बिधूना ने पशुधन के जोखिम प्रबंधन, राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम तथा गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं में खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग की रोकथाम, टीकाकरण, रोग के लक्षण, बचाव एवं उपचार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने पशुपालकों से समय-समय पर विभागीय टीकाकरण कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग करने का आह्वान किया।
वरिष्ठ दुग्ध निरीक्षक औरैया एवं राजकीय दुग्ध पर्यवेक्षक द्वारा उत्तर प्रदेश दुग्ध नीति-2022, औपचारिक डेयरी प्रसंस्करण, दुग्ध समितियों के गठन एवं संचालन, गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी गयी। उन्होंने पशुपालकों को वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने के उपाय भी बताए।मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने उपस्थित सभी पशुपालकों से अपील करते हुए कहा कि विभाग द्वारा संचालित टीकाकरण अभियानों में पूर्ण सहयोग करें तथा अपने सभी पशुओं का समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं जिससे उन्हें खुरपका-मुंहपका सहित अन्य संक्रामक रोगों से सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने पशुपालकों को विभागीय योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाकर वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक पशुपालन अपनाने तथा अपनी आय में वृद्धि करने के लिए प्रेरित किया। डेयरी कॉन्क्लेव में विभिन्न विभागों के अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि, पशुपालन एवं दुग्ध विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में पशुपालक एवं लाभार्थी आदि उपस्थित रहे।



