सौरभ मिश्रा कानपुर देहात
अधिवक्ताओं के विरुद्ध मुकदमे कायम कराकर विधि व्यवसाय पर रोक लगाने से उनकी निर्भीक, निडर और निष्पक्ष वकालत प्रभावित होगी। अधिवक्ता की आवाज और कलम पर अंकुश लगेगा तथा झूठे मुकदमों के माध्यम से उन्हें दबाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल सकता है।
यह बात जिला बार एसोसिएशन कानपुर देहात के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने जिला बार एसोसिएशन कानपुर देहात के तत्वावधान में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कपिल सिंह को सौंपते हुए कही। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं से संबंधित हालिया न्यायिक व्यवस्था में सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले गंभीर मामलों के संबंध में मामलों को गृह जनपद से दूर स्थानांतरित करने तथा विधि व्यवसाय पर रोक से जुड़े निर्देशों पर संवैधानिक एवं वैधानिक स्तर पर पुनर्विचार आवश्यक है। आरोप और दोषसिद्धि के बीच के अंतर को ध्यान में रखते हुए अधिवक्ता के पेशे और आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी विचार होना चाहिए जितेन्द्र सिंह ने कहा कि कानपुर देहात के अधिवक्ताओं के लिए चैम्बर्स की समस्या वर्षों से सबसे बड़ी व्यावहारिक समस्याओं में है। न्या
यालय भवन परिसर में चैम्बर्स के निर्माण एवं आवंटन की प्रक्रिया वर्ष 2013 में न्यायालय भवन के उद्घाटन के बाद से आज तक लंबित है। अधिवक्ता लगातार इस समस्या के समाधान की मांग करते रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि एक ओर अधिवक्ताओं के शांतिपूर्ण आंदोलन और हड़ताल पर रोक की अपेक्षा की जाती है, वहीं उनकी मूलभूत समस्याओं के समाधान पर वर्षों तक सुनवाई न होना गंभीर विषय है। महामंत्री नरेन्द्र सिंह सेंगर एडवोकेट ने कहा कि अधिवक्ताओं को सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण में विधि व्यवसाय का अवसर मिलना चाहिए। वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. प्रभा कुमारी यादव एडवोकेट ने कहा कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा और स्वतंत्र विधि व्यवसाय न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को संबोधित चार सूत्री ज्ञापन में चैम्बर्स का शीघ्र निर्माण एवं आवंटन, अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने, स्वतंत्र विधि व्यवसाय तथा शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार की रक्षा के लिए आवश्यक कार्यवाही की मांग की गई। इस अवसर पर कनिष्ठ उपाध्यक्ष सुभाषचंद्र यादव, आनन्द स्वरूप शुक्ला, संयुक्त मंत्री अवधेश कुमार निर्मल, धर्मेंद्र यादव, मनमोहन सिंह, रोहित शुक्ला, संजय सिंह, हरदीप सिंह, अंशुल सिंह, भानु प्रताप सिंह यादव, सुनित यादव एवं समरजीत यादव प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।




