केंद्र सरकार की रोक के बाद भी धड़ल्ले से बिक रही प्लास्टिक पॉलीथीन*

प्रशांत श्रीवास्तव, संवाददाता रूरा
0

 *केंद्र सरकार की रोक के बाद भी धड़ल्ले से बिक रही प्लास्टिक पॉलीथीन

पॉलीथीन के इस्तेमाल पर पाबंदी का शोर हर जगह देखने को मिलता है। लेकिन रूरा कस्बा क्षेत्र में पॉलीथीन का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। अभी भी लगभग 70 प्रतिशत दुकानदार व ग्राहक इसका उपयोग कर रहे हैं लेकिन कई दुकानदारों के पास से पॉलीथीन की बरामदगी कर जिम्मेदार कार्रवाई पूरी कर रहे हैं। इससे इस पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।पिछले साल सिंगल यूज प्लास्टिक पर केंद्र सरकार ने बैन लगा दिया था। इसके बाद भी कस्बा क्षेत्र के बाजारों में प्रतिबंधित पॉलीथीन धड़ल्ले से इस्तेमाल की जा रही है। आलम यह है कि सिंगल यूज पॉलीथीन कम होने के बजाय इसकी डिमांड और भी बाजारों में बढ़ गई है। वहीं जिस नगर परिषद पर अमल कराने का दायित्व है, उसके अधिकारी फिलहाल उदासीन बने हैं। कस्बा क्षेत्र में सब्जी मंडी से लेकर साबरे, मिठाई, दूध डेयरी, जनरल स्टोर, किराना स्टोर, कपड़ों की दुकान आदि पर पॉलीथीन का उपयोग बड़ी पैमाने पर हो रहा है। नगर पंचायत के जिम्मेदारों के सामने हीदुकानदारों के द्वारा पॉलीथीन का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन उसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। इधर कुछ महीनों से तो कर्मचारी भी नहीं की गई। जिससे कि इसके उपयोग पर रोक लग सके। पॉलिथीन के बावजूद इसका धड़ल्ले से उपयोग होना सब सोचने कह रहा है कि यह आखिर सिर्फ कागजों पर ही बैन सिद्ध कर रह गया है।अधिकारियों की अभी मौन धारण किये है।कस्बा के दुकानदारों का कहना है कि पॉलीथीन का उपयोग तो सरकार ने बंद कर दिया है, लेकिन इसका विकल्प वह अभी तक नहीं दे पायी है जो विकल्प है भी, वह काफी महंगा है। कई दुकानदारों के लिए जूट का थैला रखना संभव नहीं है। पॉलीथीन करो बैन का विकल्प क्यों नहीं? पॉलीथीन पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद सरकार ने किसी बैग के विकल्प पर कोई ध्यान नहीं दिया है। यही वजह है कि प्रतिबंध के बाद लोगों को पॉलीथीन के विकल्प का अब तक इंतजार बना हुआ है। ऐसे में पॉलीथीन का प्रतिबंध के बाद भी इस्तेमाल हो रही है। इसके अलावा ऐसी कंपनी जो पॉलीथीन का निर्माण कर रही है उन सभी कंपनियों पर पाबंदी लगनी ही जरूरत है।साथ ही आमजन को खुद भी अपनी मानसिकता में बदलाव करना होगा। इसके लिए प्रशासन की ओर से जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। जिस तरह से प्रशासन की ओर पॉलीथीन के सामानों बेचने वाले दुकानदारों से जुर्माना वसूली हो रही है, उसी तरह पॉलीथीन में सामान की खरीदारी करने वाले उपभोक्ता पर भी जुर्माना का प्रावधान होना चाहिए। तभी यह अभियान सफल होगा।मौके पर साथ आम लोगों के लिए हानिकारक है सिंगल यूज पॉलीथीन अमानक पॉलीथीन के उपयोग न करने के लिए रिसर्च और केंद्र सरकार द्वारा कई नियम बनाए गए हैं। भारत सरकार के ठोस अपशिष्ट निवारण अधिनियम के तहत 40 माइक्रोन से कम के मानक की थैली पर्यावरण को प्रदूषित करती है यही जानकारी का कहना है कि इस पॉलीथीन को रिसाइकिल नहीं किया जा सकता है। जिससे यह प्रदूषण का कारण बनती है। सबसे ज्यादा नुकसान आवारा मवेशियों और जीव-जंतुओं को इसका पॉलिथीन है। पॉलीथीन में खाना सामग्री ले जाने के बाद उसे सड़कों पर फेंक दिया जाता है। जिसे खाकर उसे और आवारा मवेशी खा लेते हैं। जो कि नुकसानदायक होता है। और इससे होने वाली बीमारी से समय से पहले ही मवेशियों की मौत हो जाती है। पॉलीथीन के उपयोग से पर्यावरण हो रहा दूषित"_ पर्यावरण को दूषित और जहरीला करने का मुख्य कारण करता वह प्लास्टिक युक्त पॉलीथीन आज जनता उपयोग में लाने के बाद सड़कों में फेंक देती है। जिनको खा तो मवेशी खा जाते हैं या जो साफ सफाई करने वाले कर्मचारी एकत्रित कर जलाते हैं कि जिसके जलने पर निकलने वाला धुआं कई अनेकों बीमारियों का कारण बनता है इसके प्रतिबंध के बाद भी भी पेमाने पर पॉलीथीन का इस्तेमाल हो रहा है। पॉलीथीन सस्ती नहीं, हाथ ठेलों, किराना, मीट, चाट, पकौड़ी की दुकानों में उपयोग होकर प्रदूषण का कारण बन रही है। नगर परिषद द्वारा सॉफ्ट के किनारे फेंक जा रहे पॉली में प्लास्टिक जलायी जा रही है। इससे पानी और हवा दोनों में जहर घुल रहा है।कस्बा क्षेत्र में कई जगह फल, फूल, सब्जी मंडी में भी पॉलीथीन का खूब इस्तेमाल हो रहा है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन के बावजूद पॉलीथीन की बिक्री नहीं हो रही है। लोग भी इसका खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके दाम में भी इजाफा हो रहा है। पहले एक पैकेट पॉलीथीन की कीमत 55 रुपये थी, आज उसकी कीमत 60 रुपये हो गई है। वहीं, कस्बा क्षेत्र में अभी में सिंगल यूज पॉलीथीन देने पर रोक नहीं बैठी जा रही है। इसकी कार्रवाई मौके का आरोप है कि कस्बा क्षेत्र की सब्जी मंडी के अधिकारियों की मिलीभगत से बैन पॉलीथीन खुलेआम बेची जा रही है।

*ज्यादा तर दुकानों व ठेलों में मिलती प्लास्टिक पॉलीथीन*

कस्बा क्षेत्र में ही ये ग्रामीण क्षेत्र जैसे पिरौली, भिखनापुर, सहित लगभग सभी जगहों पर चाय की दुकान, जूस शॉप से लेकर पकोड़ी की दुकानों में बैन पॉलीथीन दिख रही है। वहीं शिवली नगर में पॉलीथीन का इस्तेमाल करते चले एक व्यापारी में सवाल किया कि जब फैक्ट्री में खुलेआम बैन पॉलीथीन बन रही है, तब इसके इस्तेमाल पर रोक कैसे लग सकेगी। अधिकारी केवल पर लगाना नहीं चाहते हैं। केवल दुकानदार को ही परेशान किया जाता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)
3/related/default