औरिया। जनपद में यमुना नदी में मछलियों के अस्तित्व पर दोहरा संकट मंडरा रहा है। एक तरफ प्रजनन काल के दौरान भी मछलियों का अवैध शिकार धड़ल्ले से जारी है तो दूसरी तरफ नदी में छोड़े जा रहे जहरीले रासायनिक पानी के कारण बड़ी संख्या में मछलियां मर रही हैं या अधमरी हो रही हैं।
मछलियों की प्रजाति को बचाने के लिए 1 जून से 31 अगस्त तक उनके प्रजनन काल के दौरान शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है । इसके बावजूद मत्स्य विभाग की अनदेखी के चलते अयाना थाना क्षेत्र के बीझलपुर से लेकर जालौन जनपद के कुठौंद क्षेत्र तक शिकारी यमुना नदी में जाल बिछाकर अवैध शिकार कर रहे हैं ।
जिला मत्स्य कार्यकारी अधिकारी रमाकांत निरंजन ने बताया कि आगरा सहित अन्य स्थानों से यमुना नदी में केमिकल युक्त दूषित पानी छोड़े जाने की आशंका है । इसी वजह से औरैया, कानपुर देहात और बांदा तक मछलियां लगातार मर रही हैं । मछलियों के मरने की वास्तविक वजह जानने के लिए कालपी के पास से यमुना नदी के पानी का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है ।
अधिकारी ने यह भी स्वीकार किया कि नदी की गंदगी साफ करने के लिए विभाग के पास बजट का अभाव है । इसके साथ ही स्टाफ और वाहनों की कमी के कारण अवैध शिकार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है । उनके पास कानपुर देहात का अतिरिक्त प्रभार होने से स्थिति और भी जटिल हो गई है ।
ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह, जहरीली मछलियां खाने से बचें
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को विशेष सलाह दी गई है कि वे नदी में पाई जाने वाली मृत या अधमरी मछलियों का बिल्कुल भी सेवन न करें । अधिकारियों के अनुसार यदि ये मछलियां प्रदूषित पानी या रासायनिक तत्वों के कारण मरी हैं तो इनके शरीर में अत्यधिक विषैले पदार्थ जमा हो चुके हैं । ऐसी दूषित मछलियों को खाने से उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर आना या गंभीर विषाक्तता (फूड पॉइजनिंग) जैसी खतरनाक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं ।

