कानपुर देहात। जिले में अन्नदाता पर दोहरी मार पड़ रही है। 36 घंटे की लगातार भीषण बारिश से किसानों की फसलें पहले ही चौपट हो गई थीं, अब बारिश थमने के बाद रिंद नदी के उफान ने किसानों की कमर पूरी तरह तोड़ दी है।
![]() |
| पानी में डूबे खेतों से फसल निकालता किसान |
मामला तहसील रसूलाबाद के मानपुर कमसिया गांव का है। यहां से होकर गुजरने वाली रिंद नदी लगातार बारिश के चलते उफान पर है। नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है और ओवरफ्लो होकर आसपास के कई बीघा खेतों में घुस गया है। देखते ही देखते किसानों के खेत तालाब में तब्दील हो गए।
*पानी में डूबी किसानों की महीनों की मेहनत -*
इस गांव में ज्यादातर किसानों ने बाजरा और मक्का की फसल बो रखी थी, जो कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थी। लेकिन अब पूरी फसल 3 से 4 फीट पानी में डूबी हुई है। तेज बहाव के कारण बाजरे की बालियां टूटकर पानी में बिखर गई हैं। फसल को इस हालत में देख किसानों के आंसू नहीं रुक रहे।
*जान जोखिम में डालकर बीन रहे बालियां -*
अपनी फसल को डूबता देख किसान खुद को रोक नहीं पा रहे। कमर तक भरे पानी और तेज बहाव के बीच जान जोखिम में डालकर किसान खेतों में घुसे हैं। महिलाएं और पुरुष तसला, टोकरी और बोरी लेकर पानी में डूबी हुई बालियों को एक-एक कर बीन रहे हैं। कई किसान तो बांस के सहारे खेतों में फंसी फसल को खींचने की कोशिश कर रहे हैं।
एक बुजुर्ग किसान ने रोते हुए बताया, "पूरे परिवार ने 6 महीने खेत में खून-पसीना बहाया। खाद-बीज कर्ज पर लिया था। सोचा था फसल बिकेगी तो कर्ज उतरेगा और बच्चों की फीस भर पाएंगे, लेकिन नदी सब बहा ले गई। अब जो बालियां मिल रही हैं, उन्हीं को बीन कर घर ले जा रहे हैं, ताकि दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो सके।"
*प्रशासन से मुआवजे की गुहार -*
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन से मांग की है कि तत्काल राजस्व टीम और लेखपाल को मौके पर भेजकर डूबी हुई फसलों का सर्वे कराया जाए। किसानों का कहना है कि अगर जल्द मुआवजा नहीं मिला और पानी की निकासी नहीं हुई तो वे पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।
बारीश और नदी का जलस्तर बढ़ने से किसानों को नुकसान हुआ है, लेखपाल समेत टीम को मौके पर भेजकर नुकसान का आकलन किया जा रहा है, जल्द से जल्द किसानों को सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उप जिला अधिकारी रसूलाबाद


